गौतम अदाणी को समन: अमेरिकी SEC क्यों नहीं भेज सकती सीधे? भारत के कानून मंत्रालय का रोल जानें, सुप्रीम कोर्ट वकील ने बताई पूरी प्रक्रिया!

By Ravi Singh

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गौतम अदाणी की तस्वीर के साथ अमेरिकी SEC का लोगो और समन दस्तावेज
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“अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) गौतम अदाणी और सागर अदाणी को धोखाधड़ी के आरोप में समन भेजने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारत के कानून मंत्रालय ने दो बार अनुरोध ठुकरा दिया। अब SEC न्यूयॉर्क कोर्ट से ईमेल और वकीलों के जरिए समन सर्व करने की अनुमति मांग रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने हेग कन्वेंशन और भारतीय कानूनों के तहत प्रक्रिया स्पष्ट की, जिसमें विदेशी समन के लिए मंत्रालय की भूमिका अनिवार्य है।”

अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों में सिविल केस दायर किया है। यह मामला अदाणी ग्रीन एनर्जी की 750 मिलियन डॉलर की बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़ा है, जिसमें अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे। SEC का दावा है कि अदाणी ग्रुप ने बॉन्ड डॉक्यूमेंट्स में गलत और भ्रामक जानकारी दी, जिससे सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन हुआ।

भारत के कानून मंत्रालय ने SEC के समन सर्व करने के दो अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया। पहला अनुरोध फरवरी 2025 में किया गया था, जिसे अप्रैल 2025 में लौटा दिया गया, क्योंकि मंत्रालय ने सील और हस्ताक्षर की कमी का हवाला दिया। SEC ने मई 2025 में दोबारा अनुरोध भेजा, लेकिन नवंबर 2025 में इसे फिर ठुकरा दिया गया, इस बार SEC की अनौपचारिक प्रक्रियाओं के नियम 5(b) का जिक्र करते हुए, जो हेग कन्वेंशन के तहत लागू नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालतों या एजेंसियों के समन को भारत में सर्व करने के लिए हेग कन्वेंशन ऑन द सर्विस एब्रॉड ऑफ ज्यूडिशियल एंड एक्स्ट्राज्यूडिशियल डॉक्यूमेंट्स इन सिविल ऑर कमर्शियल मैटर्स का पालन अनिवार्य है। इस कन्वेंशन के तहत, भारत का कानून मंत्रालय सेंट्रल अथॉरिटी है, जो समन को लोकल कोर्ट्स के जरिए सर्व करवाता है। वकील ने बताया कि बिना मंत्रालय की मंजूरी के कोई विदेशी एजेंसी सीधे भारतीय नागरिक को समन नहीं भेज सकती, क्योंकि यह राष्ट्रीय संप्रभुता का मामला है।

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SEC ने अब ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से फेडरल रूल्स ऑफ सिविल प्रोसीजर के रूल 4(f)(3) के तहत वैकल्पिक सर्विस की अनुमति मांगी है। इसमें अदाणी के अमेरिकी वकीलों को समन सौंपना और उनके बिजनेस ईमेल पर कॉपी भेजना शामिल है। गौतम अदाणी ने Kirkland & Ellis LLP और Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan LLP को हायर किया है, जबकि सागर अदाणी ने Hecker Fink LLP को। SEC का तर्क है कि अदाणी पहले से ही केस की जानकारी रखते हैं, क्योंकि उन्होंने पब्लिक स्टेटमेंट्स जारी किए और रेगुलेटरी फाइलिंग्स में इसका जिक्र किया।

अदाणी ग्रुप ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और सभी कानूनी रास्ते अपनाने की बात कही। यह सिविल केस यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के क्रिमिनल इंडिक्टमेंट से अलग है, जिसमें सिक्योरिटीज फ्रॉड कंस्पिरेसी, वायर फ्रॉड कंस्पिरेसी और सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोप हैं।

मुख्य कानूनी बिंदु:

हेग कन्वेंशन की भूमिका: यह 1965 का अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जो 80 से ज्यादा देशों पर लागू होता है। भारत 2007 में इसमें शामिल हुआ। वकील ने बताया कि कन्वेंशन के आर्टिकल 5 के तहत, सेंट्रल अथॉरिटी समन की जांच करती है और अगर वह कानूनी रूप से वैध है, तो उसे सर्व करवाती है।

भारतीय कानूनों का असर: सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) की धारा 29 और 95 के तहत, विदेशी समन को भारत की कोर्ट्स के जरिए ही सर्व किया जा सकता है। कानून मंत्रालय इसे अहमदाबाद की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को फॉरवर्ड करता है, जहां अदाणी का रेसिडेंस है।

वैकल्पिक सर्विस के विकल्प: अगर हेग रूट फेल होता है, तो यूएस कोर्ट रूल 4(f)(3) के तहत ईमेल, वकीलों या पर्सनल सर्विस की अनुमति दे सकती है, बशर्ते यह प्रभावी नोटिस दे। वकील ने उदाहरण दिया कि ऐसे मामलों में 90% से ज्यादा बार कोर्ट अनुमति देती है।

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समन अस्वीकृति के कारणों की तालिका:

अदाणी ग्रुप पर आर्थिक असर:

कारणविवरणSEC का जवाब
पहली अस्वीकृति (अप्रैल 2025)सील और हस्ताक्षर की कमीहेग कन्वेंशन में ऐसी जरूरत नहीं; पहले बिना सील के अनुरोध सफल रहे
दूसरी अस्वीकृति (नवंबर 2025)SEC के नियम 5(b) का उल्लंघनयह नियम हेग प्रक्रिया पर लागू नहीं; SEC की अथॉरिटी पर सवाल गलत
सामान्य आपत्तिसमन की वैधता पर सवालअदाणी पहले से केस की जानकारी रखते हैं, इसलिए नोटिस प्रभावी होगा

अदाणी ग्रुप के शेयरों में इस खबर से 12.5 बिलियन डॉलर का मार्केट कैप नुकसान हुआ। अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर 13% तक गिरे, जबकि अदाणी ग्रीन के 10%। यह 2024 के इंडिक्टमेंट के बाद दूसरा बड़ा झटका है, जब ग्रुप ने बॉन्ड ऑफरिंग में रिश्वतखोरी का आरोप झेला। वकील ने कहा कि अगर समन सर्व हो जाता है, तो अदाणी को यूएस कोर्ट में पेश होना पड़ेगा, जो ग्रुप की ग्लोबल इमेज को प्रभावित करेगा।

कानूनी विशेषज्ञों की राय:

सुप्रीम कोर्ट वकील ने आगे बताया कि भारत सरकार की भूमिका संप्रभुता की रक्षा करती है, लेकिन अगर SEC वैकल्पिक रूट से सफल होती है, तो यह द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकता है। उन्होंने पिछले मामलों का जिक्र किया, जैसे विजय माल्या केस, जहां एक्सट्राडिशन में सालों लगे। अदाणी केस में, अगर यूएस कोर्ट अनुमति देती है, तो ईमेल सर्विस को भारतीय कानूनों में चुनौती दी जा सकती है।

भविष्य की संभावनाएं:

अगर कोर्ट SEC की मांग मंजूर करती है, तो अदाणी को 21 दिनों में जवाब देना होगा। वकील ने अनुमान लगाया कि केस ट्रायल तक पहुंचने में 1-2 साल लग सकते हैं, जिसमें गवाहों और डॉक्यूमेंट्स की जांच होगी। अदाणी ग्रुप ने कहा कि वे सभी आरोपों का मुकाबला करेंगे, और भारतीय रेगुलेटर्स जैसे SEBI से क्लीन चिट का हवाला देंगे।

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Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, विभिन्न स्रोतों पर आधारित।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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