“IRDAI बीमा क्षेत्र में कमीशन संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। FY25 में जीवन और गैर-जीवन बीमा में कमीशन भुगतान 1 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया, जो प्रीमियम वृद्धि से कहीं ज्यादा तेज था। नए नियमों से एजेंटों को पहले साल में मिलने वाला भारी कमीशन घट सकता है, डिफर्ड मॉडल अपनाया जा सकता है, जिससे मिस-सेलिंग रुकेगी और पॉलिसीधारकों के लिए बीमा सस्ता व टिकाऊ बनेगा। चेयरमैन अजय सेठ ने अगले 4-6 महीनों में वितरण लागत कम करने के साथ 6 बड़े सुधारों की घोषणा की है।”
IRDAI के प्रस्तावित बदलाव और उनका प्रभाव
बीमा नियामक IRDAI अब कमीशन ढांचे पर सख्ती से काम कर रहा है, क्योंकि वितरण लागत बढ़ने से बीमा किफायती नहीं रह रहा। FY25 में जीवन बीमा में कमीशन 60,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 18% ज्यादा है, जबकि प्रीमियम वृद्धि एकल अंकों में रही। कुल मिलाकर जीवन और गैर-जीवन क्षेत्र में कमीशन 1 लाख करोड़ के आसपास रहा।
IRDAI चेयरमैन अजय सेठ ने हाल ही में बताया कि अगले 4-6 महीनों में वितरण और लागत संरचना में बड़े सुधार लाए जाएंगे। इनमें कमीशन को तर्कसंगत बनाना, बिक्री चैनलों को सुव्यवस्थित करना और कुल प्रबंधन व्यय (EoM) अनुपात कम करना शामिल है। EoM में कमीशन के अलावा अन्य खर्च भी आते हैं, लेकिन फोकस मुख्य रूप से कमीशन पर है।
डिफर्ड कमीशन मॉडल पर विचार
जीवन बीमा कंपनियों ने IRDAI को सुझाव दिया है कि कमीशन को डिफर्ड (स्थगित) किया जाए। इसका मतलब है कि एजेंट या इंटरमीडियरी को पूरा कमीशन पहले साल में नहीं मिलेगा, बल्कि पॉलिसी की अवधि में फैलाया जाएगा।
व्यक्तिगत एजेंटों के लिए कमीशन 3 साल में किस्तों में।
कॉरपोरेट एजेंटों (बैंक, NBFC आदि) के लिए 5 साल में फैलाकर।
यह मॉडल म्यूचुअल फंड के ट्रेल कमीशन जैसा होगा, जहां पॉलिसी चलती रहेगी तभी आगे कमीशन मिलेगा। इससे मिस-सेलिंग कम होगी, क्योंकि एजेंट पॉलिसी को लंबे समय तक जारी रखने पर फोकस करेंगे। पहले साल में भारी कमीशन मिलने से कई बार गलत उत्पाद बेचे जाते हैं।
कमीशन कैप और EoM पर सख्ती
IRDAI Insurance Amendment Bill 2025 के तहत अब स्पष्ट रूप से कमीशन, रिवार्ड और रेमुनरेशन पर सीमा तय कर सकता है। पहले EoM के तहत सीमाएं थीं, लेकिन अब रेगुलेटर सीधे हस्तक्षेप कर सकता है। संभावित उपाय:
पहले साल के कमीशन पर टाइट कैप।
कुल EoM को म्यूचुअल फंड के TER जैसे फ्रेमवर्क में बांधना।
डिस्क्लोजर अनिवार्य करना ताकि पॉलिसीधारक को पता चले कि कितना कमीशन जा रहा है।
हेल्थ इंश्योरेंस में जहां प्रीमियम तेजी से बढ़े हैं, वहां एजेंट कमीशन को 20% तक सीमित करने के प्रस्ताव भी चर्चा में हैं। इससे अस्पताल पैकेज रेट पर भी अंकुश लग सकता है।
पॉलिसीधारकों को क्या फायदा?
प्रीमियम में कमी की संभावना : वितरण लागत 30% तक प्रीमियम का हिस्सा बनती है, जिसमें 17-18% कमीशन जाता है। अगर कमीशन घटा तो प्रीमियम कम हो सकता है, खासकर हेल्थ और लाइफ में।
बेहतर वैल्यू फॉर मनी : कम मिस-सेलिंग से पॉलिसी लंबे समय तक चलेगी, सरेंडर कम होगा।
बीमा पहुंच बढ़ेगी : सस्ता बीमा ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा, क्योंकि भारत में बीमा घनत्व अभी भी कम है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ना : IRDAI इंश्योरेंस ई-मार्केटप्लेस लॉन्च करने जा रहा है, जहां कमीशन कम होने से डायरेक्ट खरीद आसान होगी।
एजेंटों पर असर
एजेंटों की आय प्रभावित हो सकती है, खासकर नए बिजनेस पर निर्भर रहने वालों की। लेकिन लेवल कमीशन से पर्सिस्टेंसी बढ़ेगी और लंबे समय में स्थिर आय मिल सकती है। IRDAI इंडस्ट्री से फीडबैक ले रहा है, ताकि बदलाव संतुलित हों। नए नियम सितंबर 2026 तक या 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं, ड्राफ्ट जल्द पब्लिक डोमेन में आएगा।






