मैनेजर ने पत्नी-साले संग उड़ाए 590 करोड़: IDFC First Bank घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी, 4 गिरफ्तार

By Ravi Singh

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IDFC First Bank चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच, गिरफ्तार आरोपी और बैंक अधिकारी
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हरियाणा सरकार के खातों से IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा, पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार मुख्य आरोपी, पत्नी स्वाति सिंгла और साले अभिषेक सिंगला की कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स में करीब 300 करोड़ ट्रांसफर, बैंक ने 24 घंटे में 583 करोड़ समेत पूरी रकम लौटा दी, चारों गिरफ्तार, जांच जारी।

IDFC First Bank घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी

हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों में जमा करीब 590 करोड़ रुपये IDFC First Bank की चंडीगढ़ सेक्टर-32 ब्रांच से गायब हो गए थे। यह राशि मुख्य रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में पार्क की गई थी। जांच में सामने आया कि यह कोई हाई-टेक साइबर फ्रॉड नहीं था, बल्कि पुराने तरीके से जाली चेक, अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए किया गया बड़ा घोटाला था।

पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि, जो छह महीने पहले सेक्टर-32 ब्रांच के प्रमुख थे और पंचकूला निवासी हैं, इस साजिश के मुख्य मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। उनके साथ पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में नौकरी छोड़ दी थी। अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला भी इस घोटाले में कथित तौर पर शामिल पाए गए।

स्वाति सिंगला स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक पार्टनरशिप फर्म की 75 प्रतिशत मालिक हैं, जबकि अभिषेक के पास शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कंपनी के खाते में हरियाणा सरकार के फंड से करीब 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। कुछ रिपोर्ट्स में 100 करोड़ से ज्यादा की राशि का ट्रेल इस फर्म से जुड़ा पाया गया, जो सिब्लिंग्स के जरिए संचालित थी।

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घोटाले का तरीका बेहद सोचा-समझा था। बैंक कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के खातों में अनऑथराइज्ड डेबिट ट्रांजेक्शन किए, जाली चेक जारी किए और फंड को निजी खातों में डायवर्ट किया। कुल 391 से ज्यादा संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। यह हेराफेरी कई महीनों तक चली, लेकिन बैंक की इंटरनल रिकॉन्सिलिएशन कमिटी ने मिसमैच का पता लगाया।

हरियाणा के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) ने मंगलवार शाम चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी में IPS अधिकारी गंगा राम पुनिया की टीम सक्रिय रही। डायरेक्टर जनरल ए एस चावला ने पुष्टि की कि जांच अन्य सरकारी विभागों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन तक विस्तारित होगी। आरोपियों पर फॉर्जरी, क्रिमिनल ब्रिच ऑफ ट्रस्ट और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज है।

बैंक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित हरियाणा सरकार विभागों को मूलधन और ब्याज समेत कुल 583 करोड़ रुपये 24 घंटे के अंदर वापस जमा कर दिए। इससे सरकारी खातों में कोई नुकसान नहीं हुआ। बैंक ने कहा कि यह घटना आंतरिक प्रक्रियाओं में चूक को दर्शाती है, लेकिन आम ग्राहकों के फंड पूरी तरह सुरक्षित हैं।

यह मामला भारतीय बैंकिंग सिस्टम में सरकारी खातों की मॉनिटरिंग और प्राइवेट बैंकों के साथ साझेदारी की कमजोरियों को उजागर करता है। हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को इंपैनल करने की हाई-लेवल जांच भी शुरू कर दी है। कुछ अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

मुख्य तथ्य तालिका:

कुल फ्रॉड राशि: 590 करोड़ रुपये

प्रभावित खाते: हरियाणा सरकार के विभिन्न विभाग

मुख्य आरोपी: रिभव ऋषि (पूर्व ब्रांच मैनेजर), अभय कुमार (पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर)

अन्य आरोपी: स्वाति सिंगला (अभय की पत्नी, 75% शेयरधारक), अभिषेक सिंगला (स्वाति का भाई, 25% शेयरधारक)

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कंपनी: स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स

ट्रांसफर राशि कंपनी में: लगभग 300 करोड़ रुपये

रिकवरी: 583 करोड़ रुपये (मूलधन + ब्याज) 24 घंटे में

गिरफ्तारी: 24 फरवरी 2026 शाम

जांच एजेंसी: हरियाणा SV&ACB

यह घटना सरकारी फंड की सुरक्षा और बैंकिंग गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें कोई निवेश सलाह या कानूनी राय नहीं है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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