जेपी एसोसिएट्स की तरह गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड भी दिवालियापन प्रक्रिया में है। कंपनी पर कुल 4,240 करोड़ रुपये के दावे स्वीकृत हो चुके हैं। जिंदल पावर, वेदांता, हवेल्स इंडिया समेत 22 कंपनियों ने अधिग्रहण के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा किए हैं। यह भारत के पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में स्ट्रेस्ड एसेट्स पर बढ़ती रुचि को दर्शाता है। कंपनी केबल्स, वायर रॉड्स और कंडक्टर्स का प्रमुख उत्पादक है, जिसकी क्षमता अधिग्रहणकर्ताओं के लिए आकर्षक है। फाइनल रेजोल्यूशन प्लान्स की डेडलाइन 20 फरवरी है।
जेपी एसोसिएट्स के बाद बिकने जा रहा ‘गुप्ता पावर’ का कारोबारी साम्राज्य, जिंदल-वेदांता समेत 22 समूह ने लगाई बोली
गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Gupta Power Infrastructure Limited) का कारोबारी साम्राज्य अब नए मालिक की तलाश में है। कंपनी पर कुल 4,240 करोड़ रुपये के दावे स्वीकृत हो चुके हैं और यह कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत चल रही है। कोलकाता बेंच ऑफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 26 सितंबर 2025 को इनसॉल्वेंसी याचिका स्वीकार की थी, जिसके बाद प्रदीप कुमार कबरा को इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया गया।
कंपनी मुख्य रूप से पावर केबल्स, कंडक्टर्स और वायर रॉड्स का निर्माण करती है। ये उत्पाद भारत के बिजली ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ते 5जी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट्स के कारण इस सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में गुप्ता पावर के एसेट्स पर कई बड़े खिलाड़ियों की नजर है।
बोली लगाने वाले प्रमुख दावेदारों की सूची में शामिल हैं:
जिंदल पावर (Jindal Power) – पावर जेनरेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत पोजीशन।
वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) – माइनिंग, मेटल्स और एनर्जी सेक्टर का दिग्गज, वर्टिकल इंटीग्रेशन के लिए इच्छुक।
हवेल्स इंडिया (Havells India) – इलेक्ट्रिकल गुड्स और केबल्स में अग्रणी, पोर्टफोलियो विस्तार की संभावना।
अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement) – इंफ्रास्ट्रक्चर सामग्री में विस्तार।
वारई एनर्जीज (Waaree Energies) – सोलर एनर्जी से जुड़े कंडक्टर्स के लिए रणनीतिक रुचि।
टोरेंट इलेक्ट्रिकल्स (Torrent Electricals) – पावर सेक्टर में सक्रिय।
हिमाद्री स्पेशियलिटी केमिकल (Himadri Speciality Chemical) – केमिकल और मटेरियल्स से जुड़े एप्लीकेशंस।
ओरिसा मेटालिक्स (Orissa Metaliks) और ABCI इंफ्रास्ट्रक्चर्स।
अन्य इंजीनियरिंग फर्म्स जैसे ट्रांसरेल लाइटिंग, टाइटागढ़ रेल सिस्टम्स, करमतारा इंजीनियरिंग, कैबकॉन इंडिया और JSK इंडस्ट्रीज।
फाइनेंशियल प्लेयर्स जैसे ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर।
दो व्यक्तिगत निवेशक भी बोली में शामिल।
कुल 22 एंटिटीज ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जमा किए हैं। यह संख्या भारत के स्ट्रेस्ड एसेट मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दिखाती है, खासकर पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग एसेट्स पर। जेपी एसोसिएट्स के मामले में जहां अदानी, वेदांता और जिंदल जैसे ग्रुप्स ने हिस्सा लिया था, वही पैटर्न यहां दोहराया जा रहा है।
प्रक्रिया का अगला चरण
इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने फाइनल रेजोल्यूशन प्लान्स जमा करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी तय की है। EoI के बाद क्वालिफाइड बिडर्स को इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम और अन्य डिटेल्स उपलब्ध कराई जाएंगी। कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) अंतिम बोलीदाताओं में से सबसे बेहतर प्लान चुनकर NCLT को मंजूरी के लिए भेजेगी।
यह अधिग्रहण कई कंपनियों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है:
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता बढ़ाने के लिए।
रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में केबल्स और कंडक्टर्स की जरूरत।
मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का विस्तार, खासकर जहां डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्ट्रेस्ड एसेट्स पर कम वैल्यूएशन में कंट्रोल हासिल करने का मौका।
गुप्ता पावर का यह मामला IBC के तहत तेजी से रिजॉल्यूशन की दिशा में एक और उदाहरण है। सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि सफल रेजोल्यूशन से क्रेडिटर्स को अच्छी रिकवरी मिल सकती है और कंपनी की ऑपरेशंस जारी रह सकती हैं।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और बाजार ट्रेंड्स पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।






