“केंद्र सरकार ने RoDTEP योजना के तहत निर्यातकों को मिलने वाले लाभ को तत्काल प्रभाव से 50% तक सीमित कर दिया है। पहले 0.3% से 4.3% तक के रिफंड अब 0.15% से 2.15% रह जाएंगे। वैश्विक मंदी, बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिका-यूरोप जैसे बाजारों में संरक्षणवाद के बीच यह फैसला निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइशंस (FIEO) ने सरकार से इस निर्णय की समीक्षा कर पुराने लाभ बहाल करने की मांग की है, क्योंकि इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।”
सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन में कटौती की, फियो ने की तत्काल वापसी की मांग
केंद्र सरकार ने Remission of Duties and Taxes on Exported Products (RoDTEP) योजना के तहत निर्यातकों को दिए जाने वाले लाभों में भारी कटौती कर दी है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार, सभी HS लाइनों के लिए अधिसूचित दरों और वैल्यू कैप्स को तत्काल प्रभाव से 50% तक सीमित कर दिया गया है।
इससे पहले RoDTEP के तहत निर्यातित उत्पादों पर उत्पादन चरण में लगे विभिन्न करों, शुल्कों और लेवी का रिफंड मिलता था, जो उत्पाद मूल्य का 0.3% से 4.3% तक होता था। अब यह राशि घटकर 0.15% से 2.15% रह जाएगी। लाभ ट्रांसफरेबल ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप के रूप में दिए जाते हैं, जिन्हें आयात शुल्क चुकाने या बाजार में बेचा जा सकता है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय निर्यात वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जनवरी में वस्तु निर्यात में महज 0.61% की बढ़ोतरी हुई और 36.56 अरब डॉलर रहा, जबकि व्यापार घाटा बढ़कर 34.68 अरब डॉलर का तीन महीने का उच्च स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक मांग में कमी, बढ़ता संरक्षणवाद और अमेरिका में हालिया टैरिफ बदलाव (10% अतिरिक्त टैरिफ 150 दिनों के लिए) ने निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
फियो की तीखी प्रतिक्रिया और प्रमुख मांगें
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने इस फैसले को निर्यातकों के लिए चुनौतीपूर्ण समय में बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी, अनिश्चितता और संरक्षणवाद के बीच यह कटौती निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी। फियो ने सरकार से तत्काल इस निर्णय की समीक्षा करने और पुरानी दरों को बहाल करने की अपील की है।
FIEO के महानिदेशक अजय सहाय ने भी कहा कि निर्यात समुदाय ने सरकार से आग्रह किया है कि यह कदम वापस लिया जाए, क्योंकि इससे मूल्य-संवेदनशील बाजारों में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे और ऑर्डर प्रभावित होंगे।
प्रभावित क्षेत्र और आंकड़े
टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स : ये क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां RoDTEP दरें अपेक्षाकृत ऊंची थीं।
कृषि उत्पाद, केमिकल्स, प्लास्टिक : उत्पादन लागत में वृद्धि से निर्यात घट सकता है।
व्यापार घाटा : जनवरी में पहले ही घाटा बढ़ा; इस कटौती से फरवरी-मार्च में और विस्तार संभव।
निर्यात लक्ष्य : वित्त वर्ष 2026-27 में 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है, खासकर अमेरिका-यूरोप में टैरिफ अनिश्चितता के बीच।
RoDTEP योजना का संक्षिप्त विवरण
RoDTEP योजना 1 जनवरी 2021 से लागू है, जो निर्यातित वस्तुओं में निहित गैर-क्रेडिटेबल करों और शुल्कों को न्यूट्रलाइज करती है। यह MEIS योजना का स्थान ले चुकी है और निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करती है। योजना मार्च 2026 तक पहले ही बढ़ाई जा चुकी थी, लेकिन अब लाभों में कटौती से निर्यातकों में रोष है।
निर्यातकों की अन्य चुनौतियां
अमेरिका में 10% अतिरिक्त टैरिफ (फरवरी 24 से 150 दिनों के लिए)।
यूरोपीय संघ द्वारा GSP के तहत 87% भारतीय उत्पादों पर टैरिफ छूट निलंबित।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर, जहां कच्चे माल पर ज्यादा शुल्क लगता है।
फियो ने सरकार से आग्रह किया है कि बजट 2026-27 में इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाए, इनवर्टेड ड्यूटी खत्म किया जाए और निर्यात प्रोत्साहनों को मजबूत किया जाए ताकि भारतीय निर्यात वैश्विक स्तर पर मजबूत रहें।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और वर्तमान घटनाक्रम पर आधारित है। बाजार स्थितियां बदल सकती हैं। निवेश या व्यापार निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।






