तेल की कीमतों में पिछले 15 दिनों में 40% से अधिक की तेजी आई है, जहां ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 103 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा और आपूर्ति चेन का प्रभावित होना मुख्य वजह है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड फिलहाल 103 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो दाम 110-120 डॉलर तक जा सकते हैं। भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतों पर फिलहाल बड़ा असर नहीं, लेकिन लंबे समय में मुद्रास्फीति और आयात बिल बढ़ सकता है।
पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 103 डॉलर के पार पहुंच गया, जो करीब 41% की वृद्धि दर्शाता है। यह तेजी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से जुड़ी है, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित किया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का 20% हिस्सा संभालता है, जहां जहाजों पर हमले और नौसैनिक गतिविधियों ने आपूर्ति को बुरी तरह बाधित कर दिया है।
संघर्ष की शुरुआत के बाद से ब्रेंट क्रूड में लगातार तेजी आई। फरवरी के अंत में जहां भाव 73 डॉलर के आसपास था, वहीं मार्च के मध्य तक यह 103.14 डॉलर पर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 98-99 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस दौरान बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा, क्योंकि ईरान ने होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी और कई टैंकरों पर हमले हुए। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने आपूर्ति संकट को कम करने के लिए ऐतिहासिक रूप से 400 मिलियन बैरल का इमरजेंसी रिजर्व रिलीज करने का फैसला किया, लेकिन इसका असर सीमित रहा और कीमतें फिर से ऊपर चढ़ गईं।
भारत पर असर की बात करें तो देश 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। उच्च कीमतों से आयात बिल में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यदि भाव औसतन 110-115 डॉलर पर रहे तो वित्त वर्ष में आयात बिल 56-64 अरब डॉलर अतिरिक्त बढ़ सकता है। हालांकि, भारत के पास 10-15 दिनों का रणनीतिक भंडार है और रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद जारी है। सरकार ने अभी पेट्रोल-डीजल कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, क्योंकि महंगाई दर निचले स्तर पर है और तत्काल बड़ा असर नहीं दिख रहा। वित्त मंत्री ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल मुद्रास्फीति पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संभावित दामों का अनुमान
यदि संघर्ष 21 दिनों तक होर्मुज को 90% बंद रखता है, तो ब्रेंट 110-120 डॉलर तक जा सकता है।
गोल्डमैन सैक्स ने Q4 2026 के लिए अनुमान 71 डॉलर रखा, लेकिन लंबे डिसरप्शन पर ऊपर संशोधन की बात कही।
बार्क्लेज ने 85 डॉलर का अनुमान बढ़ाया।
यदि IEA का रिजर्व रिलीज प्रभावी रहा और बातचीत से तनाव कम हुआ, तो कीमतें 90 डॉलर के नीचे आ सकती हैं।
भारत में क्या प्रभाव पड़ सकता है?
| कारक | संभावित प्रभाव | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| पेट्रोल-डीजल कीमतें | $130 तक पहुंचने पर बढ़ोतरी संभव | फिलहाल स्थिर |
| मुद्रास्फीति | 30 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती है | निचले स्तर पर नियंत्रित |
| आयात बिल | 13-14 अरब डॉलर प्रति $10 बढ़ोतरी | पहले से ही उच्च |
| रूस से आयात | बढ़ोतरी की संभावना, अमेरिका छूट दे सकता है | रियायती दरों पर जारी |
| रुपया | डॉलर के मुकाबले कमजोर (92.35 स्तर) | आयात महंगा |
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ा संकट साबित हो रही है। ओपेक+ उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी प्रमुख हैं। यदि युद्ध लंबा चला तो दाम 150 डॉलर तक जाने की आशंका कुछ विशेषज्ञ जता रहे हैं, हालांकि अधिकांश 110-120 डॉलर को यथार्थवादी मानते हैं। भारत सरकार की नजर बाजार पर बनी हुई है और आवश्यक कदम उठाने की तैयारी है।
Disclaimer: यह लेख समाचार और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं। बाजार जोखिमपूर्ण है।






