कार में अवैध मॉडिफिकेशन अब सख्ती से पकड़े जा रहे हैं। डार्क टिंटेड ग्लास, लाउड एग्जॉस्ट, बुलबार और हाई-इंटेंसिटी LED लाइट्स जैसे बदलाव न सिर्फ मोटर व्हीकल एक्ट के खिलाफ हैं बल्कि सड़क सुरक्षा को खतरा भी पहुंचाते हैं। ऐसे बदलावों पर 5,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, वाहन जब्त हो सकता है और एक्सीडेंट में बीमा क्लेम भी रिजेक्ट हो सकता है।
कार में अवैध बदलाव: चालान और खतरे से बचने के लिए जानें ये 4 प्रमुख मॉडिफिकेशन
भारत में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 52 और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के तहत वाहन में कोई भी बड़ा बदलाव बिना RTO की मंजूरी के अवैध माना जाता है। 2025-2026 में नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है, खासकर मेट्रो शहरों में जहां ट्रैफिक पुलिस नियमित चेकिंग कर रही है। कई बदलाव सड़क सुरक्षा, नॉइज पॉल्यूशन और विजिबिलिटी प्रभावित करते हैं, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ता है। यहां चार सबसे आम अवैध बदलाव दिए जा रहे हैं जो चालान का कारण बनते हैं:
बहुत डार्क टिंटेड ग्लास या आफ्टरमार्केट फिल्म फ्रंट और रियर विंडशील्ड पर कम से कम 70% विजिबल लाइट ट्रांसमिशन (VLT) जरूरी है, जबकि साइड विंडोज पर 50%। आफ्टरमार्केट डार्क फिल्म या ब्लैक टिंट लगवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, भले ही VLT क्लेम किया जाए। यह नियम इसलिए है क्योंकि अंदर से बाहर की विजिबिलिटी कम होने से ड्राइवर को रोड साफ नहीं दिखती और रात में एक्सीडेंट का जोखिम बढ़ जाता है। पुलिस ऐसे वाहनों पर तुरंत चालान काट रही है। जुर्माना आमतौर पर 1,000 से 5,000 रुपये तक, लेकिन गंभीर मामलों में वाहन जब्त भी हो सकता है। कई शहरों में स्पेशल ड्राइव चल रही है जहां ऐसे वाहन पकड़े जा रहे हैं।
लाउड या आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट सिस्टम फैक्ट्री फिटेड से ज्यादा लाउड एग्जॉस्ट (80-100 डेसिबल से ऊपर) लगवाना नॉइज पॉल्यूशन नियमों का उल्लंघन है। फ्री-फ्लो या साइलेंसर-रिमूव्ड एग्जॉस्ट से आवाज बहुत तेज हो जाती है, जो आसपास के लोगों को परेशान करती है और ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकाती है। एक्सीडेंट में यह कार की सेफ्टी स्ट्रक्चर को भी प्रभावित कर सकता है। जुर्माना 5,000 से 10,000 रुपये तक, रिपीट ऑफेंस पर 20,000 तक पहुंच सकता है। कई शहरों में हजारों चालान कट चुके हैं।
बुलबार या क्रैश गार्ड बुलबार या नज गार्ड लगवाना 2017 नोटिफिकेशन के बाद से पूरी तरह प्रतिबंधित है। ये चेसिस पर बोल्टेड होते हैं, जो कार की क्रंपल जोन (एक्सीडेंट में शॉक अब्जॉर्ब करने वाली जगह) को नष्ट कर देते हैं। इससे हादसे में पैदल यात्रियों या अन्य वाहनों को ज्यादा चोट लगती है। सुप्रीम कोर्ट और MoRTH के नियमों के तहत ये अवैध हैं। पुलिस ऐसे वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है, जुर्माना 5,000 से 20,000 रुपये तक और वाहन जब्ती का प्रावधान है।
हाई-इंटेंसिटी या कलर्ड LED लाइट्स/बार लाइट्स आफ्टरमार्केट हाई-बीम LED, बार लाइट्स, स्ट्रोब लाइट्स या कलर्ड (ब्लू, रेड, ग्रीन) हेडलाइट्स लगवाना प्रतिबंधित है। ये दूसरी गाड़ियों के ड्राइवरों को ब्लाइंड कर देते हैं, खासकर रात में, जिससे हेड-ऑन कोलिजन का खतरा बढ़ता है। रूफ या बंपर पर LED बार लाइट्स भी अवैध हैं। केवल फैक्ट्री या अप्रूव्ड LED अपग्रेड ही Allowed हैं। जुर्माना 5,000 से 10,000 रुपये तक, और कई मामलों में लाइसेंस पॉइंट्स भी कटते हैं।
ये बदलाव न सिर्फ चालान का कारण बनते हैं बल्कि एक्सीडेंट में बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है, क्योंकि वाहन मूल स्पेसिफिकेशन से बदल गया होता है। RTO से अप्रूवल लेकर ही छोटे-मोटे बदलाव जैसे अलॉय व्हील्स या सस्पेंशन अपग्रेड करें। सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए वाहन को मूल रूप में रखें और नियमों का पालन करें।






