“टाटा मोटर्स ने बजट 2026 में 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली EV पर सरकारी सहायता की मांग की है, जिससे Tiago EV और Punch EV जैसी कारें सस्ती हो सकती हैं। कंपनी का कहना है कि बैटरी लागत घटाने से EV को मास मार्केट में लोकप्रिय बनाया जा सकता है, जबकि मौजूदा PM e-Drive स्कीम का फोकस बड़े वाहनों पर है।”
टाटा मोटर्स के CEO शैलेश चंद्रा ने केंद्र सरकार से अपील की है कि आगामी बजट 2026 में 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए विशेष छूट दी जाए। उनका तर्क है कि इस सेगमेंट में बैटरी की लागत कुल कीमत का 40-50% तक होती है, जिसे सब्सिडी से कम किया जा सकता है। इससे Tiago EV, जिसकी मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत 8.99 लाख रुपये से शुरू होती है, और Punch EV, जो 10.99 लाख रुपये से उपलब्ध है, की कीमतों में 15-20% की कमी आ सकती है।
कंपनी के अनुसार, भारत में EV अपनाने की दर 2025 में 2.5% से बढ़कर 5% तक पहुंच गई है, लेकिन मास एडॉप्शन के लिए अफोर्डेबल सेगमेंट पर फोकस जरूरी है। FAME II स्कीम के बाद PM e-Drive योजना में 10,900 करोड़ रुपये का आवंटन है, लेकिन यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और बसों पर केंद्रित है। टाटा ने सुझाव दिया कि बजट में PLI स्कीम को विस्तार देकर लोकल बैटरी प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जाए, जिससे आयात पर निर्भरता 70% से घटकर 50% हो सकती है।
टाटा की मांगों की मुख्य बातें:
GST सुधार: EV पर मौजूदा 5% GST को बनाए रखते हुए, बैटरी कंपोनेंट्स पर छूट बढ़ाई जाए।
सब्सिडी एक्सटेंशन: 10 लाख से कम कीमत वाली कारों के लिए 50,000-1 लाख रुपये प्रति वाहन की सब्सिडी।
इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट: चार्जिंग स्टेशन के लिए बजट में 5,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटन, विशेषकर रूरल एरिया में।
टैक्स ब्रेक: इंपोर्ट ड्यूटी में 15% कटौती बैटरी सेल्स पर, जो लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देगी।
| मॉडल | मौजूदा कीमत (एक्स-शोरूम) | संभावित छूट के बाद कीमत | बैटरी रेंज |
|---|---|---|---|
| Tiago EV | 8.99 लाख रुपये | 7.5-8 लाख रुपये | 315 km |
| Punch EV | 10.99 लाख रुपये | 9-10 लाख रुपये | 421 km |
टाटा मोटर्स ने चेतावनी दी कि बिना सरकारी सपोर्ट के, EV सेगमेंट पेट्रोल वाहनों से 20-30% महंगा रहेगा, जिससे 2026 में टारगेट 10% EV पेनेट्रेशन मुश्किल हो जाएगा। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि बजट में EV पॉलिसी क्लैरिटी से ऑटो सेक्टर में 15 लाख नई जॉब्स क्रिएट हो सकती हैं। कंपनी ने रूरल इनकम सपोर्ट की भी मांग की, ताकि छोटे शहरों में EV बिक्री 30% बढ़ सके।
इंडस्ट्री इंपैक्ट:
लेंडिंग हर्डल्स: बैंक EV लोन पर 10-12% ब्याज लेते हैं, जबकि पेट्रोल कारों पर 8-9%। बजट में लो-इंटरेस्ट स्कीम से डिमांड बढ़ सकती है।
सप्लाई चेन गैप्स: बैटरी रिसाइक्लिंग सिस्टम कमजोर होने से कॉस्ट हाई है; सरकार से 2,000 करोड़ रुपये का फंड मांगा गया।
टैक्स कन्फ्यूजन: मल्टीपल स्टेट टैक्स से EV कीमतें 5-7% बढ़ जाती हैं; यूनिफॉर्म पॉलिसी की जरूरत।
टाटा की यह अपील ऑटो इंडस्ट्री की व्यापक मांगों से जुड़ी है, जहां Hyundai और Maruti भी EV इंसेंटिव्स की पैरवी कर रहे हैं। यदि बजट में ये छूट मिलती है, तो Tiago और Punch EV जैसी कारें मिडिल क्लास के लिए अधिक एक्सेसिबल हो जाएंगी, जिससे भारत का EV टारगेट 2030 तक 30% EV शेयर हासिल करने में मदद मिलेगी।
Disclaimer: यह रिपोर्ट सामान्य जानकारी के लिए है और किसी निवेश या खरीदारी की सलाह नहीं है। सभी डेटा उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं।






