“केंद्रीय बजट 2026-27 में सुधारों और जोखिम प्रबंधन पर फोकस करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर में 11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन, कृषि क्षेत्र में जलवायु जोखिमों के लिए नई स्कीम्स, एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी बढ़ाकर 5 लाख करोड़, और रोजगार सृजन के लिए 2 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत बनाता है।”
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए गए बजट 2026-27 में सुधारों और जोखिम प्रबंधन को केंद्र में रखा है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मजबूती मिलेगी। इस बजट में कुल व्यय 48 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो पिछले वर्ष से 11% अधिक है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति मिलेगी, विशेष रूप से रोड, रेल और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में।
बजट में रिफॉर्म्स के तहत टैक्स सिस्टम को सरल बनाया गया है, जहां इनकम टैक्स स्लैब्स में बदलाव कर 7 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री रखा गया है, और स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये तक बढ़ाया गया। कॉर्पोरेट टैक्स में स्टार्टअप्स के लिए विशेष छूट दी गई है, जिससे इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। जीएसटी कलेक्शन को और कुशल बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे अनुमानित रूप से 2.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा।
जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में क्लाइमेट चेंज से जुड़े रिस्क्स पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि क्षेत्र के लिए ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर स्कीम’ लॉन्च की गई है, जिसमें 1.5 लाख करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है। यह स्कीम सूखा, बाढ़ और कीटों से फसलों की सुरक्षा के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे ड्रोन मॉनिटरिंग और AI-बेस्ड प्रेडिक्शन टूल्स का उपयोग करेगी। पिछले साल की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों जैसे बिहार और असम में पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए जाएंगे, जिससे 50 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम को 5 लाख करोड़ रुपये तक विस्तार दिया गया है, जो पहले 2 लाख करोड़ था। इससे छोटे उद्यमियों को बिना कोलेटरल के लोन मिल सकेगा, और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस को 20% बढ़ाया गया है। बजट में स्किल डेवलपमेंट के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें 50 नए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स स्थापित किए जाएंगे, विशेष रूप से EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में।
स्वास्थ्य क्षेत्र में पेंडेमिक रिस्क्स को ध्यान में रखते हुए ‘नेशनल हेल्थ रेजिलिएंस फंड’ की स्थापना की गई है, जिसमें 2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन है। यह फंड वैक्सीन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन को मजबूत करेगा। कोविड-19 के बाद की चुनौतियों से सीखते हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में 10,000 नए हेल्थ सेंटर्स खोले जाएंगे, जिससे 2 करोड़ लोगों तक पहुंच बढ़ेगी।
शिक्षा में डिजिटल रिफॉर्म्स पर जोर देते हुए, ‘डिजिटल एजुकेशन एक्सेसिबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे रिमोट एरियाज में इंटरनेट कनेक्टिविटी और टैबलेट डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित होगा, और AI-बेस्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को इंटीग्रेट किया जाएगा। उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप्स को 30% बढ़ाया गया है, जिससे 5 लाख स्टूडेंट्स को फायदा होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर रिफॉर्म्स में ‘नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर’ को तेजी से पूरा करने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड दिया गया है। इससे मुंबई-अहमदाबाद रूट के अलावा दिल्ली-चेन्नई और कोलकाता-दिल्ली रूट्स पर काम तेज होगा, जिससे ट्रांसपोर्टेशन टाइम 50% कम होगा। रिन्यूएबल एनर्जी में 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए है, जो 2030 तक 500 GW कैपेसिटी के लक्ष्य को सपोर्ट करेगा।
बजट में फाइनेंशियल रिस्क्स को मैनेज करने के लिए बैंकिंग सेक्टर में NPA रिडक्शन के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं, जिसमें एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को 50,000 करोड़ रुपये का सपोर्ट मिलेगा। इंश्योरेंस सेक्टर में पेनेट्रेशन बढ़ाने के लिए टैक्स इंसेंटिव्स दिए गए हैं, जिससे ग्रामीण इंश्योरेंस कवरेज 40% तक बढ़ सकता है।
रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए, ‘एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम’ के तहत 2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। इससे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में 1 करोड़ नई जॉब्स क्रिएट होंगी, विशेष रूप से युवाओं के लिए। स्टार्टअप इकोसिस्टम को बूस्ट करने के लिए ‘एंजेल टैक्स’ को पूरी तरह हटाया गया है, और फंड ऑफ फंड्स को 10,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं।
पर्यावरण जोखिमों से निपटने के लिए ‘ग्रीन बॉन्ड्स’ इश्यू को 1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो क्लाइमेट फाइनेंसिंग को सपोर्ट करेगा। वन क्षेत्र विस्तार के लिए 50,000 करोड़ रुपये का फंड है, जिससे कार्बन सिंक बढ़ेगा और बायोडायवर्सिटी प्रोटेक्शन सुनिश्चित होगा।
बजट आवंटन की मुख्य तालिका:
मुख्य सुधार बिंदु:
टैक्स रिफॉर्म्स: इनकम टैक्स स्लैब्स में राहत, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ोतरी।
डिजिटल इकोनॉमी: जीएसटी ट्रैकिंग अपग्रेड, ई-कॉमर्स रेगुलेशंस।
सस्टेनेबल डेवलपमेंट: ग्रीन बॉन्ड्स और वन विस्तार।
फाइनेंशियल इंक्लूजन: बैंकिंग NPA रिडक्शन और इंश्योरेंस इंसेंटिव्स।
इनोवेशन बूस्ट: स्टार्टअप टैक्स छूट और स्किल ट्रेनिंग।
| सेक्टर | आवंटन (लाख करोड़ रुपये) | पिछले वर्ष से वृद्धि (%) | मुख्य फोकस एरिया |
|---|---|---|---|
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 11.11 | 11 | रोड, रेल, एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स |
| कृषि | 1.76 | 8 | क्लाइमेट रेजिलिएंट स्कीम्स |
| स्वास्थ्य | 2.00 | 15 | पेंडेमिक रेजिलिएंस फंड |
| शिक्षा | 1.20 | 10 | डिजिटल एक्सेसिबिलिटी प्रोग्राम |
| एमएसएमई | 0.50 (क्रेडिट गारंटी) | 150 | लोन और निर्यात सपोर्ट |
| रोजगार सृजन | 2.00 | नया | इंसेंटिव स्कीम्स |
| रिन्यूएबल एनर्जी | 1.50 | 20 | सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स |
यह बजट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसे इन्फ्लेशन और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स के खिलाफ रिस्क सॉल्यूशंस प्रदान करता है, जिसमें फिस्कल डेफिसिट को 4.5% पर रखने का लक्ष्य है। राजस्व अनुमान 30 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें नॉन-टैक्स रेवेन्यू से 3.5 लाख करोड़ की उम्मीद है। डिफेंस सेक्टर में 6.21 लाख करोड़ का आवंटन है, जो मॉडर्नाइजेशन और बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करेगा।
ग्रामीण विकास के लिए ‘पीएम ग्राम विकास योजना’ को 1.8 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें जल संरक्षण और इरिगेशन प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इससे 1 करोड़ ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलेगा। महिला सशक्तिकरण के लिए ‘लक्ष्मी धन योजना’ के तहत 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो महिला उद्यमियों को लोन और ट्रेनिंग प्रदान करेगी।
शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए, ‘स्मार्ट सिटी मिशन 2.0’ के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें 20 नए शहरों को शामिल किया जाएगा। इससे ट्रैफिक मैनेजमेंट, वेस्ट रिसाइक्लिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपग्रेड किया जाएगा। टूरिज्म सेक्टर में 0.5 लाख करोड़ का निवेश है, जो हेरिटेज साइट्स और इको-टूरिज्म को प्रमोट करेगा।
बजट में सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए पेंशन स्कीम्स में 10% बढ़ोतरी की गई है, और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर वर्कर्स के लिए नई इंश्योरेंस पॉलिसीज लॉन्च की गई हैं। इससे 3 करोड़ वर्कर्स को कवर किया जाएगा। अंत में, यह बजट विकसित भारत 2047 के विजन को सपोर्ट करता है, जिसमें GDP ग्रोथ को 8% रखने का अनुमान है।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों की सटीकता की गारंटी नहीं है।






