“केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) के तहत गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी शुरू की है। देश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है, जिसे रोकने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना लाई गई है। योग्य आवेदक प्रोजेक्ट लागत का 50% सब्सिडी पा सकते हैं, जबकि न्यूनतम यूनिट में 50 मादा और 5 नर गधे जरूरी हैं।”
गधा पालन योजना: सब्सिडी, शर्तें और कमाई के रास्ते
भारत में गधों की आबादी पिछले कुछ वर्षों में काफी कम हुई है। 2012 से 2019 तक की पशुगणना के अनुसार गधों की संख्या में लगभग 60% की गिरावट आई है। मैकेनाइजेशन, ट्रांसपोर्ट में बदलाव और निर्माण क्षेत्र में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण गधों का पारंपरिक उपयोग घट गया है। इसी कमी को दूर करने और स्वदेशी नस्लों को बचाने के लिए मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के अंतर्गत विशेष प्रावधान किए हैं।
इस योजना का मुख्य फोकस गधा, घोड़ा और ऊंट जैसे पशुओं के संगठित प्रजनन फार्म स्थापित करना है। एनएलएम-उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत व्यक्तिगत उद्यमी, किसान, सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG), फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO), जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG), कोऑपरेटिव और सेक्शन 8 कंपनियां आवेदन कर सकती हैं।
प्रमुख विशेषताएं और सब्सिडी डिटेल्स
सब्सिडी राशि : कुल प्रोजेक्ट लागत का 50% कैपिटल सब्सिडी , अधिकतम 50 लाख रुपये तक।
उदाहरण : यदि आपका प्रोजेक्ट 1 करोड़ रुपये का है, तो सरकार 50 लाख रुपये की मदद देगी। बाकी राशि बैंक लोन या अपनी पूंजी से पूरी की जा सकती है।
सब्सिडी वितरण : दो किस्तों में – पहली किस्त बैंक लोन स्वीकृति के बाद, दूसरी प्रोजेक्ट पूरा होने पर।
लागू नस्ल : केवल स्वदेशी (इंडिजिनस) नस्लों पर सब्सिडी मिलेगी, विदेशी नस्लों पर नहीं।
न्यूनतम यूनिट साइज (गधा प्रजनन के लिए):
50 मादा गधे + 5 नर गधे।
अन्य पशुओं के लिए न्यूनतम यूनिट:
घोड़ा: 10 मादा + 2 नर।
ऊंट: अलग मानक लागू।
गधा पालन से कमाई के मुख्य स्रोत
गधा पालन अब सिर्फ पारंपरिक काम नहीं रहा, बल्कि इसमें कई आधुनिक बिजनेस ऑप्शन हैं:
प्रजनन और बिक्री : अच्छी नस्ल के गधों की बिक्री से प्रजनकों को अच्छी कमाई। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी छोटे स्तर पर बोझ ढोने के काम में उपयोग होता है।
गधी का दूध : गधे का दूध पोषण से भरपूर माना जाता है। इसमें कम फैट, ज्यादा विटामिन और एंटी-एजिंग गुण होते हैं। कॉस्मेटिक्स, स्किन केयर प्रोडक्ट्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स में डिमांड बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गधे के दूध की कीमत काफी ऊंची है। FSSAI ने भी इसे फूड प्रोडक्ट्स में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है।
अन्य उत्पाद : गधे की खाल, बाल और अन्य बाय-प्रोडक्ट्स से जुड़े व्यवसाय।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट : छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत।
आवेदन कैसे करें?
आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाएं।
रजिस्ट्रेशन करें और एनएलएम-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेक्शन में आवेदन फॉर्म भरें।
प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक लोन अप्रूवल और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
आवेदन के बाद विभाग द्वारा मूल्यांकन होगा और स्वीकृति मिलने पर सब्सिडी प्रक्रिया शुरू होगी।
राज्य स्तर पर पशुपालन विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।
ध्यान देने योग्य बातें
योजना का उद्देश्य केवल संरक्षण और रोजगार नहीं, बल्कि पशुपालन को लाभकारी बिजनेस बनाना है।
सब्सिडी सिर्फ कैपिटल (पूंजीगत) खर्च पर मिलती है, जैसे शेड, जानवर खरीद, फीड आदि।
प्रोजेक्ट सफल होने पर ही पूरी सब्सिडी मिलती है, इसलिए सही प्लानिंग जरूरी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जमीन उपलब्ध है, वहां यह योजना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।
यह योजना ग्रामीण भारत में नए अवसर पैदा कर रही है। यदि आपके पास जमीन और पशुपालन का अनुभव है, तो गधा पालन के जरिए लाखों की सरकारी मदद लेकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।






