नए टैक्स कानून 2025 पर सुझाव दें, आयकर विभाग दे रहा मौका – 22 फरवरी तक भेजें अपनी राय, जानें स्टेप बाय स्टेप तरीका!

By Ravi Singh

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आयकर विभाग का लोगो और टैक्स फॉर्म्स का ग्राफिक
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“आयकर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के ड्राफ्ट रूल्स और फॉर्म्स पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। सुझाव चार कैटेगरी में देने हैं: भाषा सरलीकरण, मुकदमेबाजी कम करना, कंप्लायंस बोझ घटाना और पुराने रूल्स हटाना। पब्लिक ई-पोर्टल के जरिए सबमिट कर सकती है, जिससे टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनेगा।”

आयकर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत प्रस्तावित इनकम टैक्स रूल्स 2026 और संबंधित फॉर्म्स को पब्लिक डोमेन में रखा है। यह एक्ट 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा और टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल बनाने का लक्ष्य रखता है। विभाग ने स्टेकहोल्डर्स से चार मुख्य क्षेत्रों में इनपुट मांगे हैं, ताकि अंतिम नोटिफिकेशन से पहले सुधार किए जा सकें।

ये चार कैटेगरी हैं जहां सुझाव दिए जा सकते हैं:

भाषा का सरलीकरण : रूल्स और फॉर्म्स की भाषा को आसान बनाना, ताकि आम टैक्सपेयर बिना एक्सपर्ट की मदद के समझ सकें। उदाहरण के लिए, जटिल कानूनी शब्दों को सरल हिंदी या इंग्लिश में बदलना।

मुकदमेबाजी में कमी : ऐसे प्रावधान जो टैक्स विवादों को कम करें, जैसे क्लियर डेफिनिशन या ऑटोमेटेड अपील प्रोसेस।

कंप्लायंस बोझ घटाना : फाइलिंग प्रक्रिया को तेज और कम दस्तावेजों वाली बनाना, जैसे डिजिटल वेरिफिकेशन बढ़ाना।

पुराने या अनावश्यक रूल्स और फॉर्म्स की पहचान : अप्रासंगिक नियमों को हटाना, जो अब प्रासंगिक नहीं हैं, जैसे पुरानी स्कीम्स से जुड़े फॉर्म्स।

विभाग ने ड्राफ्ट रूल्स और फॉर्म्स को ऑफिशियल वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर अपलोड किया है। यहां से कोई भी व्यक्ति या ऑर्गनाइजेशन उन्हें डाउनलोड कर पढ़ सकता है। सुझाव देने के लिए ई-पोर्टल eportal.incometax.gov.in/iec/foservices का इस्तेमाल करना होगा।

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सुझाव सबमिट करने का स्टेप बाय स्टेप तरीका:

सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं और ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड करें।

डॉक्यूमेंट्स पढ़ें और अपनी कैटेगरी चुनें।

ई-पोर्टल पर लॉगिन करें (अगर अकाउंट नहीं है तो रजिस्टर करें)।

फीडबैक फॉर्म भरें, जहां स्पेसिफिक रूल या फॉर्म नंबर का जिक्र करें।

सबमिट करें और कन्फर्मेशन ईमेल चेक करें।

यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिससे पेपर वर्क कम होता है। विभाग ने स्पष्ट किया कि सभी सुझावों को कंपाइल किया जाएगा और फाइनल रूल्स में विचार किया जाएगा। इससे टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और टैक्सपेयर्स की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

ड्राफ्ट रूल्स में कुछ प्रमुख बदलाव शामिल हैं, जैसे फेयर मार्केट वैल्यू डिटर्मिनेशन के लिए रूल 57, जो ज्वेलरी, प्रॉपर्टी जैसी एसेट्स की वैल्यूएशन को क्लियर करता है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान होगा। इसके अलावा, नए फॉर्म्स में डिजिटल सिग्नेचर को प्राथमिकता दी गई है, जो पैन कार्ड होल्डर्स के लिए फाइलिंग को स्पीड अप करेगा।

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम टैक्स रिफॉर्म्स की दिशा में महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुराने एक्ट में 500 से ज्यादा सेक्शन थे, जबकि नए में उन्हें रिड्यूस किया गया है। इससे छोटे बिजनेस और इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को फायदा होगा, जैसे ITR फाइलिंग में कम समय लगना।

सुझाव देने में ध्यान रखें कि वे स्पेसिफिक हों, जैसे किसी रूल की भाषा में बदलाव सुझाना या कंप्लायंस के लिए नया टूल प्रपोज करना। विभाग ने नेविगेटर्स भी शेयर किए हैं, जो पुराने रूल्स को नए से मैप करते हैं, ताकि कंपैरिजन आसान हो।

कैटेगरीउदाहरण सुझावसंभावित प्रभाव
भाषा सरलीकरणजटिल टर्म्स को सरल शब्दों में बदलें, जैसे ‘deemed income’ को ‘मान्य आय’।आम आदमी आसानी से समझ सकेगा।
मुकदमेबाजी कम करनाऑटोमेटेड डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम जोड़ें।कोर्ट केस 30% तक कम हो सकते हैं।
कंप्लायंस बोझ घटानाफॉर्म्स में ऑटो-फिल फीचर ऐड करें।फाइलिंग टाइम 50% रिड्यूस होगा।
पुराने रूल्स हटाना1961 के अप्रासंगिक सेक्शन जैसे पुरानी रिबेट स्कीम्स हटाएं।सिस्टम क्लीन और अपडेटेड बनेगा।

यह प्रक्रिया भारत में टैक्स गवर्नेंस को मजबूत करेगी, जहां करीब 9 करोड़ टैक्सपेयर्स हैं। नए एक्ट में फोकस डिजिटलाइजेशन पर है, जैसे e-filing को अनिवार्य बनाना। स्टेकहोल्डर्स में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, बिजनेस एसोसिएशंस और आम नागरिक शामिल हैं।

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अगर आप टैक्स प्रोफेशनल हैं, तो स्पेसिफिक प्रावधानों पर फोकस करें, जैसे कैपिटल गेंस कैलकुलेशन के नए फॉर्मूले। आम टैक्सपेयर के लिए, कंप्लायंस को आसान बनाने वाले सुझाव उपयोगी होंगे। विभाग ने कहा कि सभी फीडबैक को रिव्यू किया जाएगा, ताकि फाइनल रूल्स ज्यादा इफेक्टिव हों।

नए रूल्स में इनकम सोर्स क्लासिफिकेशन को सरल बनाया गया है, जैसे सैलरी, बिजनेस और इन्वेस्टमेंट इनकम को अलग-अलग फॉर्म्स में। इससे एरर रेट कम होगा। इसके अलावा, पेनल्टी प्रावधानों में रिलैक्सेशन दिए गए हैं, अगर कंप्लायंस में देरी हो लेकिन इंटेंट क्लियर हो।

टैक्स रिफॉर्म्स के तहत, सरकार का लक्ष्य जीडीपी में टैक्स कलेक्शन को 12% तक बढ़ाना है, जो फिलहाल 11% के आसपास है। सुझाव प्रक्रिया से यह लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

मुख्य पॉइंट्स:

ड्राफ्ट उपलब्ध: www.incometaxindia.gov.in पर।

सुझाव सबमिशन: eportal.incometax.gov.in/iec/foservices के जरिए।

फोकस एरिया: चार कैटेगरी में इनपुट।

लाभ: टैक्स सिस्टम सरल, कम विवाद, तेज प्रोसेसिंग।

यह कदम टैक्सपेयर्स को एम्पावर करता है, ताकि वे सिस्टम में अपनी आवाज शामिल कर सकें। नए एक्ट में AI बेस्ड ऑडिट को बढ़ावा दिया गया है, जो रैंडम चेकिंग को रिड्यूस करेगा।

Disclaimer: यह खबर रिपोर्ट्स, टिप्स और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। टैक्स संबंधी फैसलों के लिए प्रोफेशनल एडवाइस लें।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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