जनवरी 2026 में मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.4: ऑर्डर बढ़े फिर भी भरोसा क्यों 3.5 साल के निचले स्तर पर?

By Ravi Singh

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भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर PMI ग्राफ दर्शाते हुए फैक्टरी वर्कर्स
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जनवरी 2026 में भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.0 से बढ़कर 55.4 पर पहुंचा, जो सेक्टर में रिबाउंड दर्शाता है। नए ऑर्डर और आउटपुट में तेजी आई, लेकिन बिजनेस कॉन्फिडेंस 3.5 साल के निचले स्तर पर गिरा, जहां केवल 15% फर्म्स को ग्रोथ की उम्मीद है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने और मार्जिन प्रेशर से चिंता बढ़ी, जबकि बजट की फिस्कल पॉलिसी ने अनिश्चितता पैदा की।

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर जनवरी 2026 में मामूली रिकवरी के साथ आगे बढ़ा, जहां HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI दिसंबर 2025 के 55.0 से बढ़कर 55.4 पर पहुंच गया। यह आंकड़ा सेक्टर में एक्सपैंशन का संकेत देता है, क्योंकि PMI 50 से ऊपर रहना ग्रोथ को दर्शाता है। नए ऑर्डर में तेजी दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से डोमेस्टिक डिमांड से प्रेरित थी। फर्म्स ने बताया कि निवेश में वृद्धि और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन ने प्रोडक्शन को सपोर्ट किया। एक्सपोर्ट ऑर्डर में भी हल्की बढ़ोतरी हुई, खासकर एशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और मिडिल ईस्ट से।

हालांकि, इस सकारात्मक ट्रेंड के बावजूद, बिजनेस कॉन्फिडेंस में गिरावट चिंताजनक है। सर्वे में शामिल केवल 15% फर्म्स ने अगले साल आउटपुट ग्रोथ की उम्मीद जताई, जो 3.5 साल का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट इनपुट कॉस्ट में तेजी से जुड़ी है, जहां फूड, फ्यूल और स्टील जैसी मटेरियल्स की कीमतें चार महीनों में सबसे ज्यादा बढ़ीं। आउटपुट प्राइस में वृद्धि धीमी रही, जिससे मार्जिन पर प्रेशर बढ़ा। कॉम्पिटिटिव प्रेशर और एफिशिएंसी गेंस ने प्राइस हाइक को सीमित रखा, लेकिन इससे फर्म्स की प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हुई।

एम्प्लॉयमेंट में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जो तीन महीनों में सबसे तेज रही। फर्म्स ने जूनियर और मिड-लेवल पोजिशन्स पर हायरिंग बढ़ाई, ताकि बढ़ते वर्कलोड को हैंडल किया जा सके। इनपुट पर्चेज और इन्वेंटरी में विस्तार हुआ, जो प्रोडक्शन नीड्स और प्रीकॉशनरी बाइंग से प्रेरित था। सप्लायर्स की डिलिवरी टाइम में सुधार आया, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्शन की आशंका बनी रही।

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बजट 2026 की फिस्कल पॉलिसी ने भी अनिश्चितता बढ़ाई। स्लोअर फिस्कल कंसॉलिडेशन और हायर मार्केट बॉरोइंग्स ने मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित किया, जिससे मैन्युफैक्चरर्स कंज्यूमर डिमांड में स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं। सर्वे के अनुसार, डिमांड बूस्ट की उम्मीद बजट से जुड़ी थी, लेकिन फिस्कल ट्रेजेक्टरी में अनिश्चितता ने कॉन्फिडेंस को कम किया। ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन, जियोपॉलिटिकल टेंशन्स और इन्फ्लेशनरी प्रेशर्स ने भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को सतर्क बनाया, जिससे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान्स पर ब्रेक लगा।

PMI के प्रमुख कंपोनेंट्स का विश्लेषण

कंपोनेंटजनवरी 2026 स्कोरदिसंबर 2025 स्कोरबदलावव्याख्या
न्यू ऑर्डर56.254.8+1.4डोमेस्टिक डिमांड से तेजी, एक्सपोर्ट में मामूली ग्रोथ
आउटपुट57.155.5+1.6प्रोडक्शन में रिबाउंड, टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट से सपोर्ट
एम्प्लॉयमेंट51.350.8+0.5हल्की हायरिंग, वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए
इनपुट कॉस्ट52.451.2+1.2चार महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी, मटेरियल प्राइस हाइक से
आउटपुट प्राइस51.852.0-0.2धीमी वृद्धि, मार्जिन प्रेशर बढ़ा
बिजनेस कॉन्फिडेंस48.752.3-3.63.5 साल का निचला स्तर, केवल 15% फर्म्स ऑप्टिमिस्टिक

यह टेबल दर्शाती है कि जबकि ऑपरेशनल इंडिकेटर्स में सुधार है, कॉन्फिडेंस इंडेक्स में गिरावट सेक्टर की वल्नरेबिलिटी को हाइलाइट करती है। न्यू ऑर्डर इंडेक्स में 1.4 पॉइंट की बढ़ोतरी मुख्य रूप से डोमेस्टिक मार्केट से आई, जहां कंज्यूमर गुड्स और इंटरमीडिएट गुड्स की डिमांड मजबूत रही। आउटपुट में 1.6 पॉइंट की ग्रोथ प्रोडक्शन कैपेसिटी के बेहतर यूटीलाइजेशन से जुड़ी है।

कॉन्फिडेंस गिरावट के मुख्य कारण

इनपुट कॉस्ट प्रेशर : फर्म्स ने मटेरियल कॉस्ट में मॉडरेट बढ़ोतरी रिपोर्ट की, लेकिन आउटपुट प्राइस को कॉम्पिटिशन के कारण नहीं बढ़ा पाईं। इससे प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ा, जो लॉन्ग-टर्म ग्रोथ आउटलुक को प्रभावित कर रहा है।

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बजट अनिश्चितता : 2026 बजट में स्लोअर फिस्कल कंसॉलिडेशन और बढ़ते बॉरोइंग्स ने मार्केट में चिंता पैदा की। मैन्युफैक्चरर्स को डर है कि इससे इंटरेस्ट रेट्स बढ़ सकते हैं, जो कैपिटल इन्वेस्टमेंट को महंगा बनाएगा।

ग्लोबल फैक्टर्स : जियोपॉलिटिकल टेंशन्स और ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन से एक्सपोर्ट ग्रोथ पर ब्रेक लगा। हालांकि एक्सपोर्ट ऑर्डर बढ़े, लेकिन पेस धीमा रहा, जिससे फर्म्स सतर्क हैं।

मार्जिन स्ट्रेस : आउटपुट प्राइस में धीमी ग्रोथ ने एफिशिएंसी गेंस की जरूरत बढ़ाई, लेकिन छोटी फर्म्स के लिए यह चुनौतीपूर्ण है। सर्वे में शामिल फर्म्स ने बताया कि प्रीकॉशनरी बाइंग बढ़ी, लेकिन कॉस्ट मैनेजमेंट मुश्किल हो रहा है।

एम्प्लॉयमेंट और स्किल गैप : हायरिंग बढ़ी, लेकिन स्किल्ड वर्कर्स की कमी से प्रोडक्टिविटी प्रभावित हो रही है। फर्म्स को ट्रेनिंग इन्वेस्टमेंट बढ़ाना पड़ रहा है, जो शॉर्ट-टर्म कॉस्ट बढ़ाता है।

सेक्टर में रिबाउंड के बावजूद, PMI 50 से ऊपर रहने से जुलाई 2021 से चली एक्सपैंशन की स्ट्रीक बरकरार है। फर्म्स ने टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट और मार्केटिंग इनिशिएटिव्स से ग्रोथ की उम्मीद जताई, लेकिन ओवरऑल सेंटिमेंट कमजोर है। इन्वेंटरी बिल्ड-अप से प्रोडक्शन नीड्स को सपोर्ट मिला, लेकिन अगर डिमांड स्लोडाउन हुआ तो ओवरस्टॉकिंग रिस्क बढ़ सकता है।

सेक्टर-वाइज इंपैक्ट

कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में सबसे मजबूत ग्रोथ देखी गई, जहां न्यू ऑर्डर 58.0 पर पहुंचे। इंटरमीडिएट गुड्स में 56.5 का स्कोर रहा, जबकि कैपिटल गुड्स में 54.2 पर मामूली सुधार हुआ। छोटी और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) ने बड़े फर्म्स की तुलना में ज्यादा कॉन्फिडेंस ड्रॉप रिपोर्ट किया, क्योंकि उनके पास कॉस्ट बफर कम है।

पॉलिसी इंप्लिकेशन्स

आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी पर नजर रखनी होगी, क्योंकि इन्फ्लेशन प्रेशर से रेट कट्स में देरी हो सकती है। गवर्नमेंट को मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स बढ़ाने की जरूरत है, जैसे PLI स्कीम का एक्सटेंशन, ताकि कॉन्फिडेंस रिस्टोर हो। एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए ट्रेड एग्रीमेंट्स को फास्ट-ट्रैक करना चाहिए, जो ग्लोबल अनिश्चितता को काउंटर करे।

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तुलनात्मक ट्रेंड्स

महीनाPMI स्कोरन्यू ऑर्डर ग्रोथकॉन्फिडेंस लेवलमुख्य फैक्टर
जनवरी 202655.4तेज3.5 साल निचलाइनपुट कॉस्ट बढ़ोतरी
दिसंबर 202555.0धीमामॉडरेटडिमांड स्लोडाउन
नवंबर 202556.2मजबूतहाईएक्सपोर्ट बूस्ट
अक्टूबर 202557.1पीकहाईफेस्टिव सीजन
सितंबर 202556.8स्थिरमॉडरेटइन्फ्लेशन प्रेशर

यह टेबल पिछले महीनों से तुलना दर्शाती है कि जनवरी में रिबाउंड हुआ, लेकिन कॉन्फिडेंस ट्रेंड डाउनवर्ड है। फेस्टिव सीजन के बाद डिमांड में उतार-चढ़ाव ने सेक्टर को प्रभावित किया।

ओवरऑल, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रिकवरी सिग्नल्स मजबूत हैं, लेकिन कॉन्फिडेंस रिस्टोरेशन के लिए पॉलिसी इंटरवेंशन जरूरी है। फर्म्स को कॉस्ट मैनेजमेंट स्ट्रैटजीज अपनानी होंगी, जैसे सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन और एनर्जी एफिशिएंसी।

Disclaimer: This is a news report based on various sources. Tips provided are for informational purposes only.

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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