8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट: बजट से पहले चीफ विजिलेंस अधिकारी नियुक्त; फिटमेंट फैक्टर से सैलरी-पेंशन पर होगी नजर

By Ravi Singh

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केंद्रीय सतर्कता आयोग के नए सतर्कता आयुक्त प्रवीण वशिष्ठ की नियुक्ति और 8th Pay Commission की चर्चा वाली ग्राफिक इमेज
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“केंद्रीय सतर्कता आयोग में प्रवीण वशिष्ठ को सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया गया, जो 8th Pay Commission की प्रक्रियाओं पर निगरानी रखेंगे। फिटमेंट फैक्टर 2.85 से 3.20 तक होने की उम्मीद, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर 30,000 रुपये हो सकती है। डियरनेस अलाउंस 60% तक पहुंचने की संभावना, कर्मचारी यूनियनों की मांगों में 20% अंतरिम राहत और 50% DA मर्जर शामिल। फरवरी 12 को हड़ताल की धमकी, आयोग की सिफारिशें जनवरी 1, 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव लागू होंगी।”

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने प्रवीण वशिष्ठ को सतर्कता आयुक्त के रूप में नियुक्त किया है, जो 1991 बैच के बिहार कैडर IPS अधिकारी हैं। यह नियुक्ति 16 जनवरी को की गई, जो आगामी बजट से ठीक पहले हुई है। वशिष्ठ की भूमिका में 8th Pay Commission की प्रक्रियाओं पर सख्त निगरानी शामिल होगी, खासकर फिटमेंट फैक्टर के निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए। आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को प्रभावित करेंगी, जिसमें महंगाई भत्ता (DA) और अन्य अलाउंस को बेसिक पे में मर्ज करने की संभावनाएं हैं।

कर्मचारी संगठनों ने 50% DA को बेसिक पे/पेंशन में मर्ज करने और 1 जनवरी, 2026 से 20% अंतरिम राहत देने की मांग की है। यदि ये मांगे नहीं मानी गईं, तो फरवरी 12 को देशव्यापी हड़ताल की योजना है। आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि पंकज जैन सदस्य-सचिव और प्रोफेसर पुलक घोष पार्ट-टाइम सदस्य हैं। सिफारिशें 18 महीनों में जमा की जाएंगी, लेकिन प्रभावी तिथि 1 जनवरी, 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव होगी, जिससे एरियर्स का भुगतान होगा।

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फिटमेंट फैक्टर पर ध्यान केंद्रित करते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 2.85 से 3.20 के बीच रहेगा, जबकि यूनियन 3.68 तक की मांग कर रही हैं। 7th Pay Commission में यह 2.57 था, जो 2016 से लागू है। यदि 1.8 का फैक्टर अपनाया गया, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से 32,400 रुपये हो सकती है। Kotak Institutional Equities के अनुसार, वास्तविक सैलरी हाइक 13% के करीब होगा। DA वर्तमान में 59.93% है, जो जनवरी में 60% तक पहुंच सकता है, यदि AICPI-IW इंडेक्स में वृद्धि जारी रही।

केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या 45 लाख से अधिक है, जबकि पेंशनर्स 68 लाख हैं। आयोग की सिफारिशें राज्य सरकारों पर भी प्रभाव डालेंगी, हालांकि राज्य अलग-अलग समय पर लागू करेंगे। उदाहरण के तौर पर, लेवल 1-5 कर्मचारियों के लिए एरियर्स कैलकुलेशन फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा, जिसमें 20 महीनों की बैक पेमेंट शामिल हो सकती है, लेकिन HRA/TA पर एरियर्स नहीं मिलेंगे।

मुख्य मांगें और संभावित प्रभाव:

50% DA/DR को बेसिक पे/पेंशन में मर्ज करना, जिससे सैलरी 25-50% तक बढ़ सकती है।

अंतरिम राहत के रूप में 20% पे/पेंशन बढ़ोतरी, जो तत्काल राहत प्रदान करेगी।

न्यूनतम सैलरी को 30,000 रुपये तक बढ़ाना, जो महंगाई की भरपाई करेगी।

पेंशनर्स के लिए NPS से OPS में वापसी की मांग, लेकिन आयोग इसमें संशोधन पर विचार करेगा।

अलाउंस में वृद्धि, जैसे ट्रांसपोर्ट अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस, जो शहर-आधारित होंगे।

फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी स्ट्रक्चर (उदाहरण लेवल 1-5):

पे लेवलवर्तमान न्यूनतम बेसिक (7th CPC)अपेक्षित फिटमेंट फैक्टर 2.0अपेक्षित फिटमेंट फैक्टर 2.15अपेक्षित फिटमेंट फैक्टर 2.28अपेक्षित फिटमेंट फैक्टर 2.57अपेक्षित फिटमेंट फैक्टर 3.20 (संघ की मांग)
लेवल 118,000 रुपये36,000 रुपये38,700 रुपये41,040 रुपये46,260 रुपये57,600 रुपये
लेवल 219,900 रुपये39,800 रुपये42,785 रुपये45,372 रुपये51,143 रुपये63,680 रुपये
लेवल 321,700 रुपये43,400 रुपये46,655 रुपये49,476 रुपये55,749 रुपये69,440 रुपये
लेवल 425,500 रुपये51,000 रुपये54,825 रुपये58,140 रुपये65,535 रुपये81,600 रुपये
लेवल 529,200 रुपये58,400 रुपये62,780 रुपये66,576 रुपये75,024 रुपये93,440 रुपये

यह टेबल 20 महीनों के एरियर्स पर आधारित है, जिसमें DA हाइक को शामिल किया गया है। यदि DA 60% पहुंचा, तो कुल सैलरी में अतिरिक्त 2% वृद्धि होगी, जो नवंबर 2025 के CPI-IW पर निर्भर है।

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पेंशन पर प्रभाव:

पेंशनर्स के लिए फिटमेंट फैक्टर सीधे पेंशन राशि को प्रभावित करेगा। वर्तमान न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये है, जो 3.20 फैक्टर पर 28,800 रुपये हो सकती है। आयोग पेंशन स्कीम में सुधार पर विचार करेगा, जिसमें फैमिली पेंशन और मेडिकल अलाउंस शामिल हैं। यूनियनों की मांग है कि 50% DA मर्जर से पेंशनर्स को सालाना 10-15% अतिरिक्त लाभ मिले।

राज्यों पर प्रभाव और समयसीमा:

केंद्र की सिफारिशें राज्यों को बाध्य नहीं करतीं, लेकिन अधिकांश राज्य 1-2 वर्षों में अपनाते हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जल्दी लागू कर सकते हैं, जबकि छोटे राज्य में देरी हो सकती है। आयोग की रिपोर्ट में आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा, जिसमें GDP ग्रोथ और इन्फ्लेशन शामिल हैं।

अन्य प्रमुख बिंदु:

आयोग की टर्म ऑफ रेफरेंस में कर्मचारियों की सुझावों को शामिल करने की मांग है।

सैलरी स्ट्रक्चर में पे मैट्रिक्स को अपडेट किया जाएगा, जिसमें 18 पे लेवल्स होंगे।

अलाउंस में 25-50% बूस्ट, जैसे चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस और रिस्क अलाउंस।

पेंशनर्स के लिए ग्रेच्युटी लिमिट को 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने की संभावना।

NPS में योगदान बढ़ाने पर विचार, जो रिटायरमेंट फंड को मजबूत करेगा।

यह अपडेट केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बजट में आयोग से जुड़े प्रावधानों पर संकेत मिल सकते हैं। फिटमेंट फैक्टर का अंतिम निर्णय आर्थिक विश्लेषण पर आधारित होगा, जो महंगाई और जीवनयापन लागत को ध्यान में रखेगा।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों से प्राप्त जानकारी और टिप्स पर आधारित है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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