“बजट 2026 में सरकार न्यू टैक्स रिजीम को सरल बनाने, होम लोन पर ब्याज छूट को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख तक करने और अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को 45 लाख से ऊपर विस्तारित करने जैसी घोषणाएं कर सकती है, जिससे मिडिल क्लास परिवारों को ईएमआई में राहत, टैक्स बचत और घर खरीदने में आसानी होगी। आरबीआई की नई नियमों से फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्जेस हटेंगे, जबकि स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75 हजार से 1 लाख तक बढ़ाने की उम्मीद है।”
न्यू टैक्स रिजीम में संभावित बदलाव न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने के लिए सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर सकती है, जिससे सैलरीड क्लास को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के अधिक टैक्स-फ्री इनकम मिलेगी। पिछले बजट में टैक्स-फ्री इनकम को 12 लाख तक बढ़ाया गया था, और अब 30 प्रतिशत स्लैब को 24 लाख से आगे खिसकाने की संभावना है। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को सालाना 50 हजार तक की अतिरिक्त बचत हो सकती है। संयुक्त टैक्सेशन का विकल्प पेश किया जा सकता है, जहां सिंगल-इनकम फैमिली में पति-पत्नी की कमाई को जोड़कर टैक्स स्लैब्स का बेहतर उपयोग होगा, जैसे 6-8 लाख की अतिरिक्त छूट और 75 लाख तक सरचार्ज थ्रेशोल्ड। इससे घरेलू खर्चों पर दबाव कम होगा। इनकम टैक्स एक्ट 2025 में सेक्शंस को 536 तक घटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे टैक्स फाइलिंग सरल बनेगी और कम्प्लायंस कॉस्ट 20 प्रतिशत तक घटेगी।
संभावित टैक्स स्लैब्स (मिडिल क्लास को ध्यान में रखकर)
| इनकम रेंज (रुपये में) | पुराना रेट (%) | नया संभावित रेट (%) | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 0-15 लाख | 0 | 0 | कोई टैक्स नहीं, मिडिल क्लास को राहत |
| 15-20 लाख | 20 | 10 | सालाना 50 हजार तक बचत |
| 20-25 लाख | 20 | 15 | उच्च इनकम पर दबाव कम |
| 25-30 लाख | 30 | 20 | 30 प्रतिशत स्लैब से बचाव |
| 30 लाख से ऊपर | 30 | 25 | कुल टैक्स बोझ 15 प्रतिशत कम |
यह स्लैब्स इन्फ्लेशन को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जा सकते हैं, जहां रियल एस्टेट और अन्य कॉस्ट बढ़ने से मिडिल क्लास को बचत का मौका मिलेगा।
होम लोन ईएमआई पर राहत की उम्मीदें सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन ब्याज छूट को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग तेज है, क्योंकि 2014 से यह लिमिट नहीं बदली है जबकि ईएमआई इन्फ्लेशन से दोगुनी हो गई है। इससे एक औसत 50 लाख के लोन पर सालाना 1.5 लाख तक की टैक्स बचत होगी। आरबीआई की नई गाइडलाइंस से 1 जनवरी 2026 से फ्लोटिंग रेट लोन (होम, कार, एजुकेशन, पर्सनल) पर फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्जेस पूरी तरह हट जाएंगे, जिससे बॉरोअर्स को लोन जल्दी चुकाने में आसानी होगी और कुल ब्याज 10-15 प्रतिशत कम होगा। अगर क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बॉरोअर्स बैंक से 3 साल से पहले भी ब्याज दर कम करने की मांग कर सकेंगे, जिससे ईएमआई 20 प्रतिशत तक घट सकती है। कैश डेबिट लेकिन न मिलने पर बैंक ऑटो-क्रेडिट 5 वर्किंग डेज में करेगा, वरना 100 रुपये प्रति दिन का कंपेंसेशन देगा।
अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्ट अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को 45 लाख से बढ़ाकर 75 लाख तक करने की संभावना है, जिससे अधिक खरीदार लोअर जीएसटी रेट्स (5 प्रतिशत) का फायदा उठा सकेंगे और अपफ्रंट कॉस्ट 10 प्रतिशत कम होगा। रियल एस्टेट सेक्टर में लग्जरी होम्स की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन अफोर्डेबल सप्लाई घट रही है, इसलिए बजट में जीएसटी रेशनलाइजेशन और टैक्स इंसेंटिव्स से फर्स्ट-टाइम बायर्स को सपोर्ट मिलेगा। पीएम आवास योजना के तहत रूफटॉप सोलर को 1 करोड़ घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जो अफोर्डेबल होम्स में एनर्जी कॉस्ट 30 प्रतिशत कम करेगा। गोल्ड मेटल लोन की रिपेमेंट पीरियड को 180 से 270 दिनों तक बढ़ाया जाएगा, जो ज्वेलर्स को कैश फ्लो में मदद देगा और अप्रत्यक्ष रूप से होम फाइनेंसिंग को मजबूत करेगा।
अन्य प्रमुख अपडेट्स और सेक्टर-वाइज प्रभाव
क्रेडिट स्कोर अपडेट : हर 7 दिनों (7, 14, 21, 28 तारीख) में अपडेट होगा, जिससे लोन अप्रूवल फास्ट होगा और अच्छे स्कोर वालों को लोअर इंटरेस्ट रेट्स मिलेंगे।
जीएसटी स्लैब्स : नई स्ट्रक्चर में 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत स्टैंडर्ड, जबकि सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत, जो अफोर्डेबल गुड्स पर बोझ कम करेगा।
फैमिली नॉमिनेशन : बैंक अकाउंट्स और लॉकर्स के लिए 4 नॉमिनी तक नामित कर सकेंगे, जिससे एसेट ट्रांसफर आसान होगा।
रियल एस्टेट चैलेंजेस : लग्जरी प्रोजेक्ट्स की सेल्स मजबूत है, लेकिन अफोर्डेबल सेगमेंट में सप्लाई कम है, इसलिए बजट में अनलॉक स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स के लिए इंसेंटिव्स आ सकते हैं।
मिडिल क्लास डिमांड्स : सेवरेंस पे को टैक्स-फ्री बनाने, एनपीएस और किड्स एजुकेशन को न्यू रिजीम में शामिल करने की उम्मीद है, जिससे सालाना खर्च 1 लाख तक कम होगा।
ओवरऑल इकोनॉमिक पुश : एक्सपोर्ट्स, कस्टम्स चेंजेस और हेल्थकेयर सेक्टर को ग्रोथ के लिए फंडिंग मिल सकती है, जबकि रेलवे, डिफेंस और इंफ्रा पर अधिक जोर होगा।
संभावित चुनौतियां और सुझाव अगर 30 प्रतिशत स्लैब 50 लाख से नीचे नहीं हटाया गया, तो मिडिल क्लास पर बोझ बढ़ेगा, क्योंकि इनकम, स्पेंडिंग, सेविंग्स और इनवेस्टमेंट्स पर मल्टीपल टैक्स लगते हैं। उदाहरण: 30 प्रतिशत इनकम टैक्स, 4 प्रतिशत हेल्थ एंड एजुकेशन सेस, जीएसटी ऑन एवरीथिंग, 1 प्रतिशत टीडीएस ऑन क्रिप्टो ट्रेड्स। सुझाव: स्लैब्स को इन्फ्लेशन से मैच करें, जैसे 0-15 लाख पर जीरो टैक्स, ताकि कंजम्प्शन बढ़े और इकोनॉमी ग्रो करे।
Disclaimer: यह समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है।






