“चांदी की कीमतों में जनवरी 2026 के पहले 20 दिनों में 35% से अधिक की रिकॉर्ड तेजी देखी गई, जहां MCX पर दाम 3.2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। ब्रोकरेज हाउस ने यूनियन बजट में आयात शुल्क में कटौती की आशंका जताई, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, हालांकि लंबी अवधि में मांग मजबूत बनी रहेगी। भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक डिमांड तेजी के मुख्य कारक हैं, लेकिन तकनीकी संकेतों में कमजोरी से शॉर्ट-टर्म रिस्क बढ़ा है।”
चांदी की कीमतों ने 2026 की शुरुआत में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया है, जहां MCX पर मार्च डिलीवरी फ्यूचर्स 3,23,018 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। स्पॉट मार्केट में दिल्ली में 1 ग्राम चांदी 320 रुपये और 1 किलोग्राम 3,20,000 रुपये पर कारोबार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX पर चांदी 95 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू रही है, जो पिछले सत्र से 7.3% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस तेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया है, लेकिन ब्रोकरेज हाउस की चेतावनी ने बाजार में सतर्कता बढ़ा दी है।
जनवरी के पहले 20 दिनों में चांदी के दामों में 85,000 रुपये से अधिक की वृद्धि हुई, जो 35% से ज्यादा की ग्रोथ है। 1 जनवरी को दिल्ली में चांदी 2,38,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 3,20,000 रुपये तक पहुंच गई। MCX पर फरवरी डिलीवरी फ्यूचर्स 3,01,318 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचे, जबकि मार्च कॉन्ट्रैक्ट 3,19,949 रुपये पर बंद हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट चांदी 94.73 डॉलर प्रति औंस तक गई, जो यूएस-ईयू ट्रेड वॉर की आशंकाओं से प्रेरित है। ट्रंप प्रशासन की ग्रीनलैंड पर दावेदारी और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी ने सेफ-हेवन एसेट्स की डिमांड बढ़ाई।
तेजी के मुख्य कारक
भू-राजनीतिक तनाव: यूएस और ईयू के बीच ट्रेड डिस्प्यूट ने निवेशकों को चांदी की ओर मोड़ा। ट्रंप की टैरिफ घोषणाओं ने ग्लोबल मार्केट्स में रिस्क एवर्शन बढ़ाया, जिससे चांदी की डिमांड 4% से अधिक बढ़ी।
सप्लाई कंस्ट्रेंट्स: ग्लोबल सप्लाई डेफिसिट 2025 में 230 मिलियन औंस था, जो 2026 में भी जारी है। माइनिंग प्रोडक्शन में कमी और रिसाइक्लिंग की सीमित क्षमता ने कीमतों को सपोर्ट किया।
औद्योगिक डिमांड: सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव सेक्टर में चांदी की खपत बढ़ी। भारत में मैन्युफैक्चरिंग पुश ने इंडस्ट्रियल यूज को 25% तक बढ़ाया।
इनवेस्टमेंट फ्लो: ETFs में 30% रैली देखी गई, जहां निवेशकों ने FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) के चलते पोजिशन ली। गोल्ड-सिल्वर रेशियो 57:1 पर संकुचित हुआ, जो चांदी की रिलेटिव वैल्यू को हाइलाइट करता है।
ब्रोकरेज हाउस की चेतावनी: बजट के बाद गिरावट की आशंका
| तारीख | MCX चांदी फ्यूचर्स (रुपये प्रति किलोग्राम) | बदलाव (%) | अंतरराष्ट्रीय स्पॉट (डॉलर प्रति औंस) |
|---|---|---|---|
| 1 जनवरी 2026 | 2,38,000 | – | 71.10 |
| 9 जनवरी 2026 | 2,49,000 | +4.6 | 75.50 |
| 14 जनवरी 2026 | 2,90,000 | +16.5 | 85.00 |
| 19 जनवरी 2026 | 3,05,000 | +5.2 | 94.35 |
| 20 जनवरी 2026 | 3,20,000 | +4.9 | 95.20 |
ब्रोकरेज हाउस ने यूनियन बजट 2026 में चांदी पर आयात शुल्क में कटौती की संभावना जताई, जो घरेलू कीमतों पर दबाव डाल सकती है। वर्तमान में 15% आयात ड्यूटी है, जिसकी कटौती से इंपोर्ट बढ़ सकता है और सप्लाई सरप्लस हो सकती है। यह शॉर्ट-टर्म हेडविंड के रूप में काम करेगा, जहां कीमतें 10-15% तक गिर सकती हैं। हालांकि, लॉन्ग-टर्म आउटलुक बुलिश है, क्योंकि ग्लोबल डेफिसिट 140 मिलियन औंस तक रह सकता है।
आशंका के कारण
ड्यूटी कटौती का प्रभाव: बजट में अगर ड्यूटी घटाई गई, तो घरेलू मार्केट में सस्ती चांदी आएगी, जो प्राइस को नीचे खींचेगी। पिछले बजट में गोल्ड पर ड्यूटी कट से इसी तरह का प्रभाव देखा गया।
तकनीकी इंडिकेटर्स में कमजोरी: RSI में बेयरिश डाइवर्जेंस दिख रहा है, जहां कीमतें नई ऊंचाई पर हैं लेकिन मोमेंटम कमजोर हो रहा है। यह प्रॉफिट-बुकिंग को ट्रिगर कर सकता है।
डॉलर की मजबूती: यूएस डॉलर इंडेक्स में रिबाउंड से कमोडिटी प्रेशर बढ़ा। अगर इंटरेस्ट रेट कट की उम्मीदें कम हुईं, तो चांदी की डिमांड घट सकती है।
प्रॉफिट-बुकिंग रिस्क: रैपिड रैली के बाद निवेशक पोजिशन स्क्वेयर कर सकते हैं, खासकर बजट से पहले। जनवरी में 8 जनवरी को 10,000 रुपये की गिरावट इसी का उदाहरण है।
इंडस्ट्रियल स्लोडाउन: अगर ग्लोबल ग्रोथ स्लो हुई, तो चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड 20% तक घट सकती है, जो कीमतों को प्रभावित करेगी।
एक्सपर्ट व्यूज और स्ट्रैटेजी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी 2026 में 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती है, लेकिन बजट के बाद करेक्शन संभव है। एक ब्रोकरेज ने 3.2 लाख रुपये का टारगेट दिया, जबकि दूसरे ने 2.4 लाख रुपये का कंजर्वेटिव अनुमान लगाया। निवेशकों को डिप्स पर खरीदने की सलाह है, जहां सपोर्ट लेवल 3,03,000-2,96,600 रुपये है। रेसिस्टेंस 3,22,000 रुपये पर है। पोर्टफोलियो में 10% अलोकेशन की सिफारिश की गई, जहां सिल्वर ETFs और फ्यूचर्स ऑप्शंस हैं।
की पॉइंट्स फॉर इनवेस्टर्स
सेफ-हेवन अपील बरकरार रखें, लेकिन वोलेटिलिटी को ध्यान में रखें।
बजट से पहले पोजिशन लाइट रखें, क्योंकि ड्यूटी चेंज से 5-10% मूवमेंट संभव।
लॉन्ग-टर्म में इंडस्ट्रियल ग्रोथ (सोलर, EV) से बेनिफिट।
गोल्ड की तुलना में सिल्वर की वैल्यू बेहतर, रेशियो 50:1 के आसपास।
रिस्क मैनेजमेंट: स्टॉप-लॉस 2,98,000 रुपये पर सेट करें।
मार्केट आउटलुक
अगर भू-राजनीतिक टेंशन बढ़े, तो चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। लेकिन बजट में अगर फिस्कल डेफिसिट कंट्रोल्ड रहा और ड्यूटी कट हुई, तो शॉर्ट-टर्म में 2.75 लाख रुपये तक गिरावट आ सकती है। निवेशक डायवर्सिफिकेशन पर फोकस करें, जहां सिल्वर इंडस्ट्रियल और इनवेस्टमेंट दोनों रोल प्ले करता है। ग्लोबल फैक्टर्स जैसे चीन की एक्सपोर्ट रेस्ट्रिक्शंस और इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग पुश कीमतों को सपोर्ट करेंगे।
Disclaimer: यह रिपोर्ट बाजार के रुझानों और विशेषज्ञ विश्लेषणों पर आधारित है। निवेश से पहले पेशेवर सलाह लें, क्योंकि बाजार जोखिम भरा है।






